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जावेद खान।
गोंदिया। पिछले 35 वर्षो से लोकसभा और राज्यसभा में संसद सदस्य के रूप में निरंतर रहकर राजनीति में ऊंची उड़ान भरने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वर्तमान सांसद प्रफुल्ल पटेल का राजनीतिक सफर बहोत ऊंचा रहा है। प्रफुल पटेल ने अपनी राजनीति की शुरुवात वर्ष 1985 में गोंदिया नगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में की थी और अपनी काबलियत के भरोसे उन्होंने वार्ड की गल्ली से दिल्ली तक का सफर तय किया था। प्रफुल्ल पटेल के इसी राजनीतिक सफर में उस व्यक्ति को भी बखूबी जाना जाता है जो उनका प्रखर प्रहरी, साया बनकर पिछले 30 वर्षों से निरंतर साथ चल रहा है। वो व्यक्ति कोई और नही, बल्कि राजेन्द्र जैन है।
राजेन्द्र जैन उस शख्सियत का नाम है जिसने अपना पूरा जीवन अपने आदर्श नेता प्रफुल्ल पटेल के लिए समर्पित कर दिया। कोई लोभ, पद प्रतिष्ठा की चिंता किये बिना राजेन्द्र जैन एक ईमानदार साथी के रूप में प्रफुल्ल पटेल की परछाई बनकर चलते रहे। राजेन्द्र जैन पिछले 30 वर्षों से अधिक समय से प्रफुल्ल पटेल के भरोसेमंद साथी के रूप में जाने जाते है। राजेन्द्र जैन ने पटेल के साथ अपनी राजनीतिक शुरुवात उनके निजी सहायक के रूप में बनकर की थी, उनके कार्य से प्रभावित होकर पटेल ने पूर्व विदर्भ के जिलों में पार्टी की जिम्मेदारी उन पर सौंप दी। राजेन्द्र जैन ने प्रफुल्ल पटेल के आदेशों का पालन कर राष्ट्रवादी कांग्रेस को नागपुर, भंडारा, गोंदिया में मजबूत करने का कार्य किया।
भंडारा-गोंदिया की राजनीति में सांसद प्रफुल्ल पटेल के बाद राजेन्द्र जैन का नाम सबसे ऊपर आंका जाता है। यूं कहें तो राजेन्द्र जैन ने जो कहा समझो प्रफुल्ल पटेल ने कहा। प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व एवं राजेन्द्र जैन के कुशल कार्यो के चलते भंडारा-गोंदिया में एनसीपी में ऐसे कई नेता जुड़े जो पार्टी में दिग्गज और कद्दावर बनें। पार्टी की साख को मजबूती देकर सहकार क्षेत्र, जिला परिषद, पंचायत समिति, नगर पंचायत, नगर परिषद, विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा में एनसीपी ने झंडे गाड़े।
प्रफुल पटेल के नेतृत्व में नाना पंचबुद्धे, विलास श्रृंगारपवार जैसे सहकार नेता राज्यमंत्री बनें। मधुकर कुकडे जैसे सीनियर नेता सांसद बनें। दिलीप बंसोड़, राजू कारेमोरे, मनोहर चन्द्रिकापुरे, राजकुमार बडोले विधायक बनें। सहकारिता क्षेत्र में भंडारा जिला मध्यवर्ती बैंक से सुनील फुंडे अध्यक्ष बने, वही प्रफुल्ल पटेल के साथी राजेन्द्र जैन वर्ष 2004 से 2010 और 2010 से 2016 ऐसे विधान परिषद के 12 साल तक सदस्य रहे।
राजेन्द्र जैन पिछले 20 साल से गोंदिया डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को ऑपरेटिव्ह बैंक के अध्यक्ष है। वही विदर्भ की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्था, गोंदिया शिक्षण संस्था में सचिव है। राजेन्द्र जैन वो नाम है जिसे सांसद प्रफुल्ल पटेल के बाद आदर से लिया जाता है। राजेन्द्र जैन को भंडारा-गोंदिया में कुशल राजनीतिज्ञ कहा जाता है। राजनितिक दांवपेंच में माहिर इस शख्स को ऐसा मदारी कहा जाता है जिसे डमरू बजाकर भीड़ जमाने की कला है।
आज इस कुशल राजनीतिज्ञ को प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा में लेकर उन्हें इतने सालों की पक्षनिष्ठा, पक्ष के प्रति समर्पित भावना का आदर कर उन्हें उनका अधिकार प्रदान किया है। ऐसा अधिकार, जहाँ बड़े बड़े दिग्गज उस राज्यसभा सीट को पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे। ये राज्यसभा सीट, स्व. अजीतदादा पवार की पत्नी, महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्राताई पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। ये महाराष्ट्र में इकलौती सीट रही जिससे राजेन्द्र जैन राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। प्रफुल्ल पटेल द्वारा एनसीपी में दिग्गज नेताओं के बीच एकाएक अपने भरोसेमंद साथी राजेन्द्र जैन को भंडारा-गोंदिया से उठाकर फ्रंट में लाने से पूरे महाराष्ट्र में राजनीति गर्म रही वही राजेन्द्र जैन एक चर्चित चेहरे के रूप में देखे गए। महायुति गठबंधन के तहत एनसीपी से राजेन्द्र जैन के नाम को राज्यसभा के लिए चयनित कर उन्हें राज्यसभा सांसद बनाना, प्रफुल्ल पटेल के राजनीतिक कद को दर्शाता है। आज भी प्रफुल्ल पटेल की स्व.अजीतदादा पवार के बाद एनसीपी में पकड़ मजबूत है एवं पवार परिवार के वे नजदीकी है ये साफ स्पष्ट दिखाता है।
राज्यसभा से सांसद प्रफुल्ल पटेल के बाद सांसद राजेन्द्र जैन पहले नेता है जो भंडारा-गोंदिया जिले से नेतृत्व करेंगे। देखा जाए तो अब हमारे दोनों जिलो में यानी संसदीय क्षेत्र में कुल 3 सांसद हो गए, जो राजधानी दिल्ली के उच्च सदन में बैठकर जनप्रतिनिधित्व करेंगे।
